Friday, May 17, 2024
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परशुराम महादेव मंदिर का इतिहास

भगवान ‘परशुराम’ ने कुल्हाड़ी के वार से बनाया था शिव मंदिर, राजस्थान की इस गुफा में आज भी दिखते हैं कई चमत्कार।

हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार वे आज भी इस धरती पर तपस्या में लीन हैं।

राजस्थान के अरावली में एक शिव मंदिर स्थित है जिसे परशुराम महादेव गुफा मंदिर के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि पहाड़ियों की गुफा में स्थित परशुराम महादेव गुफा मंदिर का निर्माण स्वयं परशुराम ने अपने फरसे से किया था। उसने अपनी कुल्हाड़ी से चट्टान को काटा था। परशुराम एक महान तपस्वी और भगवान के अवतार हैं। वह सात चिरंजीवियों में से एक हैं। हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार वह आज भी इस धरती पर तपस्या में लीन हैं।

मान्यता है कि अरावली पहाड़ियों की गुफा में स्थित परशुराम महादेव गुफा मंदिर का निर्माण स्वयं परशुराम ने अपने फरसे से किया था। उसने अपनी कुल्हाड़ी से चट्टान को काटा था। गुफा के अंदर एक शिवलिंग है। यह स्वयंभू शिवलिंग है यानी इसकी उत्पत्ति यहां स्वयं हुई थी। भगवान परशुराम ने यहां कई वर्षों तक तपस्या की थी। पहाड़ी पर स्थित इस गुफा मंदिर तक पहुंचने के लिए 500 सीढ़ियां तय करनी पड़ती हैं। इस मंदिर की ऊंचाई समुद्र तल से लगभग 3600 फीट है।

यहीं से परशुराम जी को फरसा मिला था

यहां आने वाले भक्तों का कहना है कि यहां की गई तपस्या से ही उन्हें भगवान शिव से धनुष और अक्षय तरकश प्राप्त हुआ था। उस तरकश के तीर कभी ख़त्म नहीं होते थे और धनुष हमेशा निशाने पर सटीक वार करता था. यहीं से उन्हें अपना प्रसिद्ध फरसा प्राप्त हुआ। यह पूरी गुफा एक चट्टान पर बनी हुई है। शिवलिंग पर गौमुख है, जिससे जल की धारा भगवान शिव पर गिरती है।

परशुराम जी ने पुनः राक्षस का वध किया था

गुफा में चट्टान पर एक राक्षस की आकृति भी बनी हुई है। कहा जाता है कि इस राक्षस को परशुराम ने अपने फरसे से मार डाला था। स्थानीय लोग इसे अमरनाथ धाम इसलिए कहते हैं क्योंकि जिस तरह कश्मीर में स्थित अमरनाथ धाम में भगवान शिव विराजमान हैं, उसी तरह यहां भी शिव का अखंड वास है।

परशुराम जी, यह बात आज तक रहस्य बनी हुई है।

गौरतलब है कि परशुराम महादेव मंदिर राजस्थान के राजसमंद और पाली जिले की सीमा पर स्थित है। गुफा जहां राजसमंद जिले में आती है, वहीं कुंड पाली जिले में है। शिवलिंग के बारे में कहा जाता है कि इस पर सैकड़ों लीटर जल चढ़ाने के बाद भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है। भी यह उसे सोख लेता है क्योंकि इसमें एक छेद होता है। जबकि दूध चढ़ाने पर वह छेद में नहीं समाता. इसका कारण आज तक लोगों के लिए रहस्य बना हुआ है। श्रावण माह में यहां मेला भी लगता है जिसमें कई भक्त भगवान शिव और परशुराम के दर्शन करने आते हैं।

परशुराम महादेव मंदिर – पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. परशुराम महादेव मंदिर क्या है? उत्तर: परशुराम महादेव मंदिर राजस्थान, भारत में स्थित एक प्रमुख शिव मंदिर है। यह मंदिर भगवान शिव के पुराने और पवित्र स्थलों में से एक है और यह धार्मिक तीर्थ स्थल के रूप में भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

2. परशुराम महादेव मंदिर कहां स्थित है? उत्तर: परशुराम महादेव मंदिर राजस्थान के राजसमंद और पाली जिले की सीमा पर स्थित है। यह मंदिर जोधपुर और उदयपुर के बीच लगभग 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

3. मंदिर के शिवलिंग की विशेषता क्या है? उत्तर: परशुराम महादेव मंदिर का शिवलिंग काफी विशेष है। कहते हैं कि इस शिवलिंग पर सैकड़ों लीटर जल चढ़ाने के बाद भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है और यहां भक्तजन शिवरात्रि और महाशिवरात्रि जैसे महत्वपूर्ण पर्वों पर विशेष पूजा अर्चना करते हैं।

4. परशुराम महादेव मंदिर में दर्शन के लिए समय क्या है? उत्तर: परशुराम महादेव मंदिर दिनभर खुला रहता है। भक्तजन मंदिर में निम्नलिखित समय में दर्शन कर सकते हैं:

  • सुबह: सुबह 6:00 बजे से
  • शाम: शाम 8:00 बजे तक

5. मंदिर के आस-पास आरामदायक स्थान और होटल की सुविधा कैसी है? उत्तर: परशुराम महादेव मंदिर के आस-पास आपको आरामदायक स्थान और होटल की सुविधा मिलेगी। यहां आप अपनी यात्रा के दौरान आराम से ठहर सकते हैं और अपने धार्मिक अनुष्ठानों को सुखद बना सकते हैं।

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